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गुरुवार, 20 जनवरी 2022

छठे चरण के तुरंत बाद सातवें चरण की शिक्षक बहाली को लेकर विभाग तैयारी में जुट गई है..डी०एल०एड० परीक्षा 2020 का परीक्षाफल देखें

छठे चरण के तुरंत बाद सातवें चरण की शिक्षक बहाली को लेकर विभाग तैयारी में जुट गई है..

शिक्षा विभाग अपर मुख्य सचिव संजय ने बिहार बोर्ड को पत्र लिख कर डी.एल.एड. (D.El.Ed) शैक्षणिक सत्र 2019-21 परीक्षा का परिणाम घोषित करने की मांग की हैं। जिसमें छठे चरण की शिक्षक बहाली को अपने अंतिम पड़ाव में बताते हुए कहा कि इसके तुरत बाद सातवें चरण की शिक्षक बहाली होनी हैं।


#डीएलएड_रिजल्ट_जल्द_जारी_करो कैंपेन सफल। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा d.El.Ed का परीक्षा फल जारी किया। प्रशिक्षणार्थी अपना परीक्षाफल वेबसाईट नीचे दिए गए लिंक पे देख सकते हैं पर देख सकते हैं।




शनिवार, 8 जनवरी 2022

रेलवे के निःशुल्क WiFi से पढ़कर केरल में कुली का कार्य करने वाले श्रीनाथ बने सिविल सर्विस अधिकारी..

एर्नाकुलम रेलवे जंक्शन पर कुली का काम करने वाले श्रीनाथ ने रेलवे स्टेशन के फ्री वाईफाई से पढ़ाई करके सिविल सर्विस ज्वाइन किया..

श्रीनाथ मुन्नार के मूल निवासी हैं और एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते है। श्रीनाथ हमेशा अपने परिवार के बारे में सोचते थे और चाहते थे कि कैसे भी परिवार के भविष्य को बेहतर बनाया जाए। उनकी एक बेटी भी है, वह चाहते थे कि जैसा बचपन उन्होंगे झेला है वैसा उनकी बेटी के साथ ना हो।

एक दिन उनके मन में केरल लोक सेवा आयोग (KPSC) परीक्षा देने का विचार आया, लेकिन वह जानते थे कि वह कोचिंग सेंटर की फीस नहीं दे पाएंगे। अतः उन्होंने एक तरकीब निकाली वे दिन भर आजीविका के लिए स्टेशन पर कुली का काम करने लगे और साथ ही स्टेेशन के फ्री वाईफाई से पढ़ाई करते थे। वे हमेशा पढ़े गए प्रश्नों को मन ही मन हल भी करते रहते थें। 

वर्ष 2018 में उनकी ये मेहनत रंग लाई, श्रीनाथ अभी भू-राजस्व विभाग के विलेज फील्ड असिस्टेंट के रूप में कार्यरत हैं।

मंगलवार, 4 जनवरी 2022

एक कलक्टर ऐसा भी..बिना कुछ कहे सादगी से नालंदा को अलविदा कह गए डीएम योगेंद्र सिंह। रेलवे टिकट काउंटर पर खुद लाइन में लगकर टिकट लिए और अकेले ही ट्रेन से रवाना हो गए।

नालंदा के 37वें डीएम रहे योगेंद्र सिंह की सादगी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। बिना ताम-झाम के जिला को अलविदा कह गए। फेयरवेल पार्टी को शालीनता से मना किया,हाथ में ट्राली बैग व बाडीगार्ड को नए डीएम के साथ रहने की बात कह एक आम पब्लिक की तरह लाइन में लगकर ट्रेन का टिकट लिया और श्रमजीवी ट्रेन में बैठकर पटना की ओर रवाना हो गए। जानकारी के अनुसार नगर आयुक्त तरणजोत सिंह को प्रभार दिया,सिम डीडीसी को दिया और वे अपने नये पदस्थापना वाले जिला समस्तीपुर के लिए निकल पड़े। नालंदा जिला गठन के बाद योगेंद्र सिंह 37वें जिलाधिकारी थे। लेकिन स्थानांतरण के बाद जिस तरह वे नालंदा से रवाना हुए ,शायद ऐसा किसी डीएम के कार्यकाल में देखने को नहीं मिला।



प्राप्त जानकारी के अनुसार सुबह आठ बजे डीएम ने कर्मियों को अपनी गाड़ी लगाने कहा वह भी बगैर अंगरक्षक एक ट्रॉली लेकर अपनी गाड़ी में बैठे और सीधे बिहारशरीफ रेलवे स्टेशन पहुंचे और अकेले पटना के लिए रवाना हो गये। रेलवे स्टेशन पर श्रमजीवी एक्सप्रेस पकड़ने आये सैकड़ों लोग यह देखकर स्तब्ध थे कि स्थानांतरण के बाद किस सादगी के साथ योगेंद्र सिंह ने जिला को अलविदा कहा। बता दें कि योगेंद्र सिंह 2012 बैच के आईएएस अधिकारी है। सबसे पहले पटना सिटी के एसडीओ, बेतिया के उप विकास आयुक्त और शेखपुरा के जिलाधिकारी रह चुके है। उत्तर प्रदेश के उन्नांव जिले के हरिपुर के रहने वाले योगेंद्र सिंह की पहचान जिले में एक तेजतर्रार व विकास के लिए हमेशा अग्रसर रहने वाले अधिकारी के रूप में रही। ज़ू सफारी के फाइनल टच देने तक मे इनका अहम योगदान रहा। वे लगभग 35 महीने तक नालंदा के डीएम के रूप में रहे।